Home / ShriNews Special / किन्नरों के बारे में ये बात जानेंगे तो आपका दिल दहल जाएगा, आज भी जारी है ऐसी प्रथा

किन्नरों के बारे में ये बात जानेंगे तो आपका दिल दहल जाएगा, आज भी जारी है ऐसी प्रथा

हमारे समाज में ‘हिजड़ा’ या ‘छक्का’ शब्द रोज सुनाई दे जाते हैं। पर समाज जिन तिरस्कृत किन्नरों या ट्रांसजेंडर के लिए ये शब्द प्रयोग करता है वो हमें कभी-कभी ट्रैफिक सिग्नल, किसी शादी, बारात जैसे शुभअवसर पर या ट्रेन में पैसे मांगते ही दिखते हैं। या यूं कहें कि हमने हमेशा इन जगहों के सिवाए और कहीं देखा ही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2014 में इन्हें तीसरे लिंग या ट्रांसजेंडर की मान्यता मिलने के बावजूद भी हम इन्हें अपने समाज में सहजता से स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। कुछ माह पहले ही केंद्र सरकार ने भी ट्रांसजेंडर की भूमिका समाज में पूरी तरह से सुनिश्चित करने के लिए नए गाइडलाइंस जारी किए थे जिसमें कहा गया था कि ट्रांसजेंडर कम्युनिटी को भी वही मान-सम्मान मिले, जो कि भारत के आम नागरिकों को मिलता है। इसी कैंपेन में उन्हें अपनी सुविधा के हिसाब टॉयलेट चुनने के अधिकार की बात भी की गई थी।

लेकिन कहीं न कहीं हमारे समाज में अभी भी ट्रांसजेंडर्स को लेकर जो कुंठाएं बनी हुई थीं वह बरकरार हैं। सरकार और विभिन्न संस्थाओं द्वारा की जा रही अनेक पहलों का भी इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। लोगों के मन में अभी भी इनकी आईडेंटिटी को लेकर कई सारे सवाल हैं ऐसे में आइये जानतें हैं थर्ड जेंडर को लेकर कुछ ज़रूरी बातें जो सभी को मालूम होनी चाहिए। ट्रांसजेंडर वे होते हैं जिनकी पैदाइश के समय उनके जेंडर यानि कि वह मर्द हैं या औरत इसका फर्क समझ में न आए। यही ट्रांसजेंडर बड़े होकर दो तरह के हो सकते हैं – ट्रांसजेंडर मर्द या ट्रांसजेंडर औरत।

ट्रांसजेंडर मर्द

जब ये पैदा होते हैं तब इन्हें लड़की ही माना जाता है लेकिन जैसे-जैसे ये बड़े होते हैं इनका व्यक्तित्व लड़कों जैसा होने लगता है। इन्हें लड़कियों जैसा रहन-सहन पसंद नहीं आता। ज़्यादातर मामलों में ये मेडिकल ट्रीटमेंट के ज़रिए मर्दाने सेक्शुअल और रिप्रोक्डिव ऑर्गन लगवा लेते हैं। हालांकि उनमें टेस्टिकल्स लगाना ज़रा मुश्किल होता है।

ट्रांसजेंडर औरतें

ये वो हैं जिन्हें हम ज़्यादातर अपने आस-पास देख सकते हैं। इनकी पैदाइश तो लड़कों की होती है लेकिन ये जवान होते हुए खुद को लड़की जैसा महसूस करते हैं।

ये अपने मर्दों वाले हार्मोन्स हटवाकर या सर्जरी से मर्दाना जेनिटल्स को हटाकर वो औरतों वाली सारी खूबियां पूरी तरह से अपना लेते हैं हैं। इस सर्जरी में मर्दाना जैनिटल्स को वजाइना में बदल दिया जाता है। इसके अलावा सर्जरी से बच्चे पैदा करने वाले अंग, यूट्रस, ओवेरी को भी ट्रांसप्लांट कराया जाता है। हालांकि मेडिकल साइंस में जनानांग ट्रांसप्लांट कराना बहुत रिस्क वाला काम माना जाता है।

अगर इसे साफ शब्दों में समझाया जाए तो जो लोग अपने पैदाइशी लिंग से अलग या उसके विपरीत महसूस करते हैं। वो ट्रांसजेंडर होते हैं। यानि कि अगर कोई लड़का पैदा हुआ है पर वह खुद को लड़की जैसा महसूस करता है। वैसे ही कपड़े पहनना चाहता है। वैसा ही दिखना चाहता है तो वह ट्रांसजेंडर है। वैसे ये दिलचस्प बात है कि कई ट्रांसजेंडर्स का ऐसा मानना है कि उनमें से ज़्यादातर लोग स्ट्रेट होते हैं। उनमें बहुत कम ही ऐसे होते हैं जो कि समलैंगिक हों।

इन ट्रांसजेंडर्स की जिंदगी का सबसे दर्दनाक पहलू-

हमें नहीं पता होता कि ये ट्रांसजेंडर या फिर किन्नर मर जाते हैं तो उनका क्या होता है? न हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इनकी मौत के बारे में कुछ सुनते ही हैं, न ही किसी को कभी इनकी मौत पर बात करते कभी सुना जाता है। दरअसल इस पर बात होती ही नहीं। क्योंकि भारत का गृहस्थ वर्ग इस बारे में बात करना शुभ नहीं मानता।

पर हमें जानना ज़रूरी है कि सभी को हंसाने और खुश रहने की दुआएं देने वाले इन किन्नरों का अंत बेहद ही दुखद होता है।
दरअसल मरने के बाद किन्नरों के शव को जलाया नहीं जाता है बल्कि दफनाया जाता है। पर ये प्रक्रिया इतनी सीधी-सादी नहीं होती। इससे पहले किन्नर की लाश को जूते-चप्पलों से पीटा जाता है और सभी से छिपाकर दफनाने की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है। इसके पीछे किन्नरों का विश्वास है कि किसी के देख लेने से किन्नर को फिर से किन्नर के रूप में ही जन्म मिलता है। किसी किन्नर की मौत के बाद सभी किन्नर एक हफ्ते का उपवास रखते हैं। मौत के बाद ये काफी दान वगैरह भी करते हैं।

वैसे ये बात भी जाननी ज़रूरी है कि भारत में जो किन्नर या ट्रांसजेंडर हैं वह अगर समलैंगिक होते और दुनिया में कहीं और होते तो गे/लेस्बियन होते। पर भारत में चूंकि ये मान्य नहीं है इसलिए छोटी जगहों के स्तर पर हमारा ये रुढ़िवादी समाज उन पर समाज इतना ध्यान नहीं देता। उनके पास विकल्प बस यही होता है कि वो किन्नर समुदाय में शामिल हो जाएं।

वैसे आपको ये बता दें कि देश में हर साल किन्नरों की संख्या में तकरीब 40 से 50 हज़ार की संख्या में बढ़ोत्तरी होती है। देशभर में 90 फिसदी ऐसे किन्नर होते हैं, जो जन्मजात किन्नर नहीं होते बल्कि उन्हें किन्नर बनाया जाता है। वर्तमान में देश में पचास लाख से भी ज्यादा ट्रांसजेंडर मौजूद हैं और इन्हें अब तीसरे लिंग की श्रेणी भी प्रदान कर दी गई है पर आज भी इनका समुदाय समाज के दायरे से दूर अपनी एक अलग ज़िंदगी बिता रहा है और अपने अलग तरह के रुढ़िवादी रीति-रिवाज़ों और संस्कारों का आज भी पालन कर रहा है जिनके बारे में आपको या हमको पूरी जानकारी भी नहीं मिल पाती। यही कारण है कि इस परंपरा को आज भी ढोया जा रहा है जबकि ये पूरी तरह से मानवता के खिलाफ है।

About Avinash Dwivedi

Check Also

How to Renew your Passport in United Kingdom – British Passport Renewal [HM Passport Officials]

Get your British passport renewal in just few and simple steps – Information guide to …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: