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मेधा पाटकर ने बिगाड़े शिवराज के सुर, पढ़िए सरदार सरोवर बांध विवाद का पूरा इतिहास

हालिया बवाल सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाकर 138 मीटर किए जाने को लेकर है। जिससे मध्यप्रदेश की नर्मदा घाटी के 192 गांवों और इनमें बसे करीब 40 हजार परिवारों के बांध के पानी के डूब क्षेत्र में चले जाने की आशंका है। ये मामला सुप्रीम कोर्ट में भी जा चुका है, जहां अदालत ने आस-पास के गांवों को 31 जुलाई तक खाली करने का आदेश दिया था। पर समयसीमा बीत चुकी है और गांवों को खाली नहीं कराया जा सका है। सामाजिक कार्यकर्ता और नर्मदा बचाओ आंदोलन की संस्थापक मेधा पाटकर पुनर्वास की गड़बड़ियों को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ अनिश्चितकालीन अनशन कर रही थीं।

नर्मदा बचाओ आंदोलन के सदस्यों का कहना है कि पुनर्वास के लिए जो नई बस्तियां बसाई गई हैं, वहां पर सुविधाओं का अभाव है। जिसके चलते ज्यादातर लोग उन बस्तियों में जाने को तैयार नहीं हैं। इसी समस्या के खिलाफ वो अनशन कर रहे हैं। मेधा पाटकर अपने अन्य 11 सदस्यों के साथ मध्यप्रदेश के धार जिले के चिखल्दा गांव में अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठी हैं। इसी अनशन के दौरान मेंधा पाटकर की तबीयत बिगड़ने लगी थी। जिसके बाद प्रशासन ने उन्हें जबरदस्ती अस्पताल में भर्ती कराया था। पुलिस ने उन्हें जबरदस्ती उठाकर एंबुलेंस में डाला और विरोध करने वालों पर लाठीचार्ज भी किया। जहां उन्हें नजरबंदी की हालत में रखा गया और किसी से भी मिलने नहीं दिया गया।

मेधा को इंदौर के बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने वहां भी अपना अनशन जारी रखा और अनशन के 14वें दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। इसके बाद जब मेधा अस्पताल से निकलकर अपने कुछ साथियों के साथ बड़वानी जा रही थीं तो उन्हें रास्ते में ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। नर्मदा बचाओ आंदोलन के एक कार्यकर्ता ने बताया कि एक पुलिस वाला जबरदस्ती कार में बैठ गया और कार को लेकर धार की ओर चला गया। बाद ने पुलिस ने स्वीकार किया कि मेधा पाटकर को बड़वानी जाते हुए गिरफ्तार किया गया है। उनके बड़वानी पहुंचने से विस्थापितों के उग्र होने की आशंका थी। हालांकि गिरफ्तारी के बाद उन्हें रिहा होने के लिए मुचलका भरने को कहा गया, मगर उनके ऐसा ना करने पर उन्हें धार जिले की जेल भेज दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

नर्मदा नदी पर बना है सरदार सरोवर बांध। ये दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है। सरकार का मानना है इस बांध परियोजना के जरिए गुजरात राज्य को पानी और मध्यप्रदेश को बिजली सहित, महाराष्ट्र राज्य को भी सिंचाई जैसे लाभ होंगे। गौरतलब है कि नर्मदा नदी गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र तीन राज्यों से गुजरती है और अरब सागर में जाकर मिल जाती है। इस बांध परियोजना पर 1993 से काम चल रहा है और अब यह परियोजना अपनी अनुमानित लागत से बहुत ऊपर चली गई है। साथ ही बांध बनने की शुरुआत से ही स्थानीय लोगों ने ठीक मुआवजा ना मिलने और पुनर्वास ना होने के चलते बहुत विरोध किया है। सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने नर्मदा नदी के पर्यावरणीय महत्व को समझाते हुए और साथ ही विस्थापितों के तमाम मुद्दों को लेकर ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की मुहिम शुरू की थी। जिसे वो आज भी चला रही हैं।

कौन हैं मेधा पाटकर?

मेधा पाटकर सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्हें ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की संस्थापक के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने नर्मदा नदी को बचाने के लिए चलाए आंदोलन को अपना पूरा वक्त देने के लिए अपनी पीएचडी की पढ़ाई छोड़ दी थी।

सरकार का दोहरा चरित्र

सोमवार को जब मेधा पाटकर को गिरफ्तार किया गया तो मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट्स की एक सीरीज में अपने संवेदनशील होने की दुहाई देते हुए कहा कि मेधा पाटकर को गिरफ्तार नहीं किया गया है बल्कि उन्हें और उनके साथियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पर अब सरकार अपने रुख से पलटते हुए उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

सरकार इंटरनेट के जरिए भी साध रही है निशाना?

सोची समझी साजिश के तहत माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर मेधा पाटकर को विभिन्न एकाउंट से ट्वीट करके निशाना बनाया जा रहा है। तमाम एकाउंट से ये दावा करते हुए कि उनका नुकसान हो पर देश का भला होगा, अलग-अलग ट्वीट्स किए जा रहे हैं और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रयासों की सराहना की जा रही है। पर वास्तव में दर्जनों ही एकाउंट से एक ही भाषा में ट्वीट सरकार की सारी पोल खोलकर रख दे रहे हैं। इसके अलावा इन ट्विटर एकाउंट्स पर मेधा पाटकर के लिए चेतावनी भी ट्वीट की जा रही है। वो भी कई अलग-अलग एकाउंट्स से एक ही भाषा में। इन एकाउंट्स के राज्य की आईटीसेल से संचालित होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

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