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आपसे शुरू होती है बच्चे की खुशियां

आज से अधिकांश अभिभावकों की तरह आपके लिए भी सबसे बड़ी चुनौती है, अपने बच्चे की देखभाल करने के साथ ही दूसरी जिम्मेदारियों को भी कुशलता से निभाना। जीवन की व्यस्तताओं के चलते अक्सर कई जिम्मेदारियां एक साथ संभालने में काफी समय और ऊर्जा लग जाती है। पर यह भी सच है कि बच्चे को खाना खिलाने, उसे नहलाने और उसके लिए सामान लाने जैसे काम उसके जन्म से उत्सव मनाने का मौका देते हैं। यह एक अवसर की तरह है जो आपके बच्चे के विकास में सहायक होता है और उसमें आत्मबोध, आत्म नियंत्रण, जिज्ञाासा, संचार क्षमता और सामाजिकता के विकास में मदद करता है। आप ही अपने बच्चे में दुनिया के बारे में जानने की ललक पैदा करती है। इस अंक में हम आपके लिए लेकर आए है, जन्म से लेकर बारह माह तक के बच्चे के पालन पोषण से जुडी जानकारियों का पिटारा ताकि अपने बच्चे को आप थोड़ाा और बेहतर तरीके से समझ सकें और उसे और अच्छी परवरिश दे सकें।

बन जाइए पालन-पोषण में पारंगत
बच्चे का पालन-पोषण कोई पहले से नहीं सीख सकता। बच्चे और मां के बीच दोस्ती धीरे-धीरे होती है। पर, घबराने की जरुरत नहीं है, क्योंकि हमारी मदद से आप अपने बच्चे को कुछ और बेहतर तरीके से जान पाएंगी।
आपने अब तक सुना होगा कि बच्चा जन्म लेने के बाद कुछ माह तक १८-२० घंटे सोता है। बिल्कुल परेशान नहीं करताा। पर, सच्चाई सिर्फ यही नहीं होती। कहते हैं अगर जानकारी हो तो चुनौती का सामना हम बेहतर तरीके से कर सकते हैं। यही बात बच्चे के पालन पोषण के मामले में लागू होती है।

ऐसे मिटाएं उसकी भूख
अपने बच्चे को जब मां दूध पिलाती हैं तो वह उसे सिर्फ जरूरी पोषण ही प्रदान नहीं कर रही होती। बच्चे को दूध पिलाकर आप कई और तरह से उसकी मदद कर रही होती हैं। आप उसे भरोसा दिला रही हैं कि इस दुनिया में आने के बाद वह पूरी तरह से सुरक्षित है। बच्चे का भूख शांत करके आप उसे बेहतर महसूस करवाने में भी मदद करती हैं। जब बच्चे का पेट भरा रहता है तो वह अपने दूसरे सबसे महत्वपूर्ण काम पर अपनी सारी ऊर्जा केंद्रित कर पाता है। वह काम है- अपने आसपास की दुनिया को देखना और समझना। बच्चा यह काम आपका चेहरा देखकर, आपकी बातें करते हुए धीरे-धीरे उसका सिर सहलाती है तो वह यह समझ पाता है कि यहां कोई उससे बेहद प्यार करने वाला और उसकी देखभाल करने वाला है। वह इस बात को समझने लगता है कि वह आप पर विश्वास कर सकता है और आप पर निर्भर रह सकता है। आपके माध्यम से वह पहली बार किसी पर विश्वास करना सीखता है और यह सीख जिंदगी भर उसके लिए सेहतमंद रिश्ते की नींव के तौर पर काम करती है।
जब वो देखेगा कि आप तक अपनी बात पहुंचाने की उसकी कोशिशें सफल हो रही हैं, तो इससे उसकी लैंग्वेज स्किल्स विकसित होगी। वह रोता है क्योंकि उसे भूख लगी है, आप आती हैं, उसे फीड करवाती हैं और वो अच्छा महसूस करने लगताा है। आपका ऐसा करना उसे आप तक अपनी और बात पहुंचाने के लिए प्रेरित करता है। वह पहले अपनी हरकतों से और आवाज से और बाद में शब्दों के माध्यम से अपनी बात आप तक पहुंचाना सीखता है। इससे वह कारण और उसके प्रभाव को बेहतर तरीके से समझ पाता है (मैं रोता हूं, मम्मा या पापा आ जाते हैं)। वह अपने आसपास की दुनिया को समझना शुरू कर पाता है।

ऐसे पहुंचाएं बच्चे को आराम
जब आप बच्चे को चुप करवाने की कोशिश करती हैं तो आप एक तरह से उसे यह समझा रही होती हैं कि यह दुनिया उसके लिए पूरी तरह से सुरक्षित है और यहां कोई है जिसे उसकी भावनाओं की फिक्र है। बच्चा जितना संतुष्ट महसूस करेगा, नई चीजों, नए लोगों और अपने आसपास की नई दुनिया को समझने के लिए उसके पास उतनी ज्यादा ऊर्जा रहेगी। बच्चे के रोते ही अगर आप तुरंत उसके पास पहुंच रही हैं तो इस माध्यम से आप उसे यह समझा रही हैं कि आप हमेशा उसकी देखभाल करेंंगी और वह यह सीख रहा है कि वह अच्छी तरह अपनी बात समझा पा रहा है। यह मत सोचिए कि बच्चे के रोने पर तुरंत उसके पास पहुंचकर और उसे चुप करवाकर आप उसे बिगाड़ रही हैं। कुछ शोधों से यह बात साबित हो चुकी है कि जिन बच्चों को तुरंत चुप कराने की कोशिश की जाती है वो आगे चलकर कम रोते हैं, क्योंकि उन्हें मालूम होता है कि उनकी परेशानी तुरंत दूर कर दी जाएगी। बच्चे को शांत करवाने की कोशिश मे आप उसे भी यह सिखा रही होती हैं कि वह खुद को कैसे शांत रखे। अगर आपके गले लगाने से बच्चा चुप हो रहा है या सो रहा है तो कुछ वक्त बाद वह अपने पसंदीदा टेडीबियर को पकड़कर सोना शुरू कर देगा।

आप क्या कर सकती हैं
जब बच्चा आपको यह संकेत दे कि वह परेशान है तो उसे शांत करने के लिए तरह-तरह के तरीके अपनाएं। देखें कि कहीं उसे भूख तो नहीं लगी है या फिर उसे डकार करवाने की जरूरत तो नहीं है। उसका डायपर जांचें। उसे अलग-अलग तरीके से गोदी में लें। उसे लोरी सुनाएं या उससे बातें करें। उसे झूला झुलाएं या फिर बााहर घुमाने ले जाएं। यह सीखने और जानने की कोशिश करें कि आपका बच्चा क्या करने पर शांत होता है। उदाहरण के लिए कुछ बच्चे एक साथ बहुत सारी चीजें करने पर और परेशान हो जाते हैं। बच्चे को शांत करने के लिए एक बार में एक चीज करें। उसे लोरी सुनाएं, झूला झुलाएं या फिर उसकी आंखों में देखते हुए उससे बातें करें। कुछ ही दिनों में आप यह जान लेंगी कि क्या करने से आपका बच्चा तुरंत चुप हो जाता है। बच्चे को दूध पिलाते वक्त उससे धीमी धीमी आवाज में बातें करती रहें। उसके बाल और शरीर को हौले-हौले सहलाएं ताकि वह आपके स्पर्श को पहचान सके।

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