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इंसानियत हुई शर्मसार, सास की लाश को गठरी में बांधकर 40 किलोमीटर पैदल चला दामाद

अपने सास का शव कंधे पे लेकर घूमता मजदूर

 

इलाहाबाद – यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के जिले इलाहाबाद में इंसानियत को शर्मसार करने और सरकारी सिस्टम के दावों की पोल खोलने वाला एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। यहां सरकारी शव वाहन न मिलने से एक गरीब मजदूर को अपनी सास की लाश को गठरी में बांधकर उसे लाठी के सहारे कंधे पर रखकर पैदल ही चालीस किलोमीटर तक चलना पड़ा। गरीबी और बेबसी के चलते श्रवण कुमार बनने को मजबूर इस मजदूर की हकीकत जानकर आधे रास्ते में लोगों ने चंदा कर कुछ आर्थिक मदद की बल्कि प्रशासन पर दबाव डालकर एक प्राइवेट एम्बुलेंस का इंतजाम भी कराया। लाठी के सहारे गठरी में बंधी लाश को कंधे पर रखकर चालीस किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर इस मजदूर को बाद में भले ही कुछ मदद मिल गई हो, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर से न सिर्फ सरकारी सिस्टम की पोल खोल दी है, बल्कि इंसानियत को भी शर्मसार कर दिया है। इलाहाबाद की इस घटना ने योगी सरकार के दावों पर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

मध्य प्रदेश के रीवां जिले का रहने वाला नचकू नाम का युवक इलाहाबाद के करछना इलाके में पिछले कुछ महीनो से मजदूरी करता था। वह पत्नी और बीमार सास को लेकर करछना इलाके में ही रहता था। पैंसठ साल की बुजुर्ग सास कैंसर की बीमारी से पीड़ित थीं और इन दिनों उठने बैठने में भी लाचार थीं। इक्कीस नवम्बर को नचकू अपनी बीमार सास का इलाज कराने के लिए पत्नी के साथ टेम्पो पर बैठकर उन्हें अस्पताल ले जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी सांस थम गई। मौत के बाद टेम्पो वाले ने उन्हें उतार दिया। नचकू और उसकी पत्नी ने लाश अपने पैतृक स्थान रीवां ले जाने के लिए नजदीक के सरकारी अस्पताल से एम्बुलेंस की मदद मांगी तो वहां से उन्हें वापस कर दिया गया। प्राइवेट एम्बुलेंस वालों ने दो से ढाई हजार रूपये मांगे जो नचकू और उसकी पत्नी की हैसियत के बाहर थे। कई घंटे बाद भी कोई एम्बुलेंस व दूसरा वाहन नहीं मिला तो नचकू ने ऐसा फैसला किया, जिसे सुनकर किसी के भी पैरों तले ज़मीन खिसक सकती है। गरीब नचकू ने अपनी सास की लाश को एक चादर में बांधा और गठरी को एक लाठी में फंसा दिया। बैलेंस बनाने के लिए उसने दूसरी तरफ कुछ पत्थर व कपडे दूसरी चादर में बांध दिए। इसके बाद वह कलयुग का श्रवण कुमार बन सिस्टम के मुंह पर तमाचा मारते हुए पत्नी के साथ पैदल ही आगे बढ़ने लगा। आठ घंटे में तकरीबन चालीस घंटे का सफर तय करते हुए जब नचकू और उसकी पत्नी रोते हुए आगे बढ़ने लगे तो सड़क किनारे खड़े लोगों ने उसे रोककर बात की। नचकू की हकीकत जानकर लोगों के होश उड़ गए। इलाके के लोगों ने फ़ौरन एसडीएम व पुलिस को खबर की। शंकरगढ़ के एसएचओ अमित मिश्र ने मौके पर पहुंचकर एक प्राइवेट एम्बुलेंस का इंतजाम कराया और उसका किराया खुद अपने पैसे व चंदे से अदा किया। लोगों ने कुछ चंदा इकठ्ठा कर नचकू व उसकी पत्नी को दिया। जिले के डीएम सुहास एल वाई ने इस बारे में कोई जानकारी होने से भी इंकार किया। उन्होंने इसे अफसोसजनक घटना करार दिया और जांच कराने की बात कही।

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