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किन्नर भी होंगे इलाहाबाद के मेयर पद के प्रत्याशी

 

इलाहाबाद/लखनऊ :- भारत में चुनाव आयोग ने सैकड़ों साल पुरानी अवधारणाओं को तोड़ते हुए, किन्नरों को एक अलग पहचान देने का फ़ैसला किया था आपको बता दूं कि सन 2009 में लिया गया एक फ़ैसले में चुनाव आयोग ने व्यवस्था की थी कि किन्नरों और समलैंगिकों को अपने लिंग के तौर पर अब पुरुष या स्त्री लिखने की बाध्यता नहीं होगी।भारत में जनगणना में किन्नरों को अलग से किसी श्रेणी में नहीं रखा जाता लेकिन अनुमान है कि इनकी संख्या लगभग दस लाख तक है।किन्नर अधिकार समूहों ने चुनाव आयोग के इस फ़ैसले का स्वागत किया था इसी कड़ी में वर्ष 2002 में मध्यप्रदेश के सुहागपुर विधासभा क्षेत्र से देश के पहली किन्नर विधायक शबनम मौसी ने इस फ़ैसले पर खुशी ज़ाहिर करते हुए एक बड़े न्यूज़ एजेंसी से कहाँ था “एक ऐसे समाज को पहचान देकर जो सदियों से तिरस्कार और भेदभाव का शिकार रहा है, चुनाव आयोग ने प्रशंसनीय कार्य किया है। ”लेकिन शबनम मौसी ने कहा, “किन्नर समाज को तिरस्कार से बचाने में निश्चित तौर पर ये एक बड़ा कदम है।लेकिन इस दिशा में अभी काफ़ी कुछ किए जाने की ज़रुरत है।”उन्होंने कहा कि किन्नर समाज काफ़ी समय से राज्य विधानसभाओं और संसद में आरक्षण की मांग कर रहा है। अपने अनुभव की बात करते हुए शबनम मौसी ने कहा था कि  “मैं चुनाव जीती, क्योंकि लोग नेताओं से नाराज़ थे।मेरी जीत से मुझे समाज में कुछ सम्मान ज़रुर मिला, पर किन्नर समाज के तिरस्कार को समाप्त करने के लिए उनको समुचित प्रतिनिधित्व देने की ज़रुरत है।

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार आयोग को इस सिलसिले में कई ज्ञापन मिले। इन ज्ञापनों पर ग़ौर करने के बाद चुनाव आयोग ने महसूस किया था कि समाज के एक ख़ास तब़के को क्यों बाहर छोड़ा जाए।किन्नर समाज को वोट देने के अधिकार और चुनाव लड़ने की अनुमति देने की मांग अलग-अलग राज्यों में उठती रही है। ठीक इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव होने जा रहे हैं उसी में आज एक आवाज़ इलाहाबाद में भी उठी जहाँ इलाहबाद के वकीलों ने तय किया की इस बार “किन्नर ” भी इलाहाबाद के मेयर पद का चुनाव लड़ेंगे।

आप को बता दे मिली जानकारी के अनुसार इस इलाहाबाद के वकीलों के संगठन ने किन्नर को मेयर के चुनाव में उतारने का फैसला किया हैं । अभी तक जो भी चुनाव किन्नरों ने लड़ा वह महज पब्लिक सिटी स्टंट कहा जा सकता हैं मगर इलाहाबाद शहर में एक नए बदलाव की बयार बह चली हैं इलाहाबाद से नई चुनावी रणनीति बनाकर मेयर कर चुनाव में इस बार वकीलों के एक संगठन ने इस बार एक किन्नर को मेयर का चुनाव लड़ाकर जो पहल करने जा रहा इसका साक्षी इस बार उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव भी होगा ।

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