Breaking News
Home / नगरे / प्रयाग / ऑटो रिक्शा चला अपने परिवार का भरण-पोषण करती तबस्सुम बनी अन्य महिलाओं के लिए मिसाल

ऑटो रिक्शा चला अपने परिवार का भरण-पोषण करती तबस्सुम बनी अन्य महिलाओं के लिए मिसाल

 

इलाहाबाद – दहेज़ के दानव से लड़ते लड़ते हर साल देश में न जाने कितनी लाचार महिलाये या तो जिंदगी से हार मानकर मौत को गले लगा लेती है या फिर उन्हें दहेज़ न देने पर अपनी जान गवानी पड़ती है लेकिन इलाहाबद की तबस्सुम ने दहेज़ की पीड़ा से जूझ रही महिलाओ के लिए एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसे सुनकर आप भी हैरत में पड़ जायेंगे । दहेज़ लाने के तबस्सुम के शौहर ने तबस्सुम को पहले लोहे की गरम सलाखों से दागा गया फिर उसकी कलाइयों को चाकू से कुरेदा गया। पति के अमानवीय उत्पीड़न से जिंदगी से  हारकर  लाचारी में तबस्सुम ने अपने चार साल के बच्चे को गोद में लेकर इलाहाबद के जमुना पुल से छलांग लगाकर खुदकुशी करने पहुंच गई लेकिन अचानक उसकी जिंदगी में ऐसा मोड़ आया की उसने अपने इरादे बदल दिए ।  वह एक शेलटर होम चली आई और वही रहकर जिंदगी के संघर्ष और कामयाबी की एक ऐसी शुरुआत की आज वह खुद ऑटो चलाकर आधा दर्जन लोगो का पेट भर्ती है और उसका एकलौता बेटा शहर के सबसे नामचीन स्कूल में तालीम हासिल कर रहा है ।

​इलाहाबद की सड़को में फरार्टे से दौड़ रही यह ऑटो रिक्शा शहर में ही नहीं बल्कि आसपास के इलाके में लोगो के बीच चर्चा की वजह बनी हुई है । चर्चा की वजह रिक्शा चला रही यह युवती तबस्सुम नहीं बल्कि तबस्सुम के पीछे की वह संघर्ष की कहानी है  जिसे सुनकर आप भी हैरत में पड़ जायेगे । प्रतापगढ़ के एक छोटे से गाँव नरसिंघ पुर  में रहने वाली तबस्सुम की कहानी भी किसी हिन्दी फिल्म की स्टोरी जैसी है । गाँव की अनपढ़ लड़की तबस्सुम का 18 बरस में उसी गाँव के एक युवक नसीम से निकाह हो गया और एक ही साल में उसके घर खुशिया भी आ गई जब तबस्सुम माँ बनी । तबस्सुम का बच्चा अब्दुलाह अभी सात दिन का ही हुआ था की उसके पति  नसीम ने उसे दहेज़ के लिए यातनाये देनी शुरू कर दी । तबस्सुम को लोहे की गरम सलाखों से जलाया गया और  फिर उसके पति ने दहेज़ के लिए घर से निकाल दिया । मायके जाकर तबस्सुम ने कोर्ट में अपने हक़ के लिए इन्साफ का दरवाजा खटखटाया और वह गुजारे भत्ते का केस जीत भी गई । केस जीतकर तबस्सुम वापस  नसीम के पास जब वापस आई तो नसीम एक बार इंसानियत की हदें तोड़ते हुए तबस्सुम की कलाई को चाकुओ से गोद डाला । ​

​तबस्सुम अब जिंदगी से निराश हो चुकी थी । घर में तीन दिनों तक भूखे रहने के बाद पैदल अपने ससुराल प्रतापगढ़ जिले के नरसिंग पुर गाँव से चलते हुए तब्बसुम अपने बच्चे के साथ इलाहाबद के यमुना पुल पहुंची । तबस्सुम इसी पुल से अपने बच्चे को लेकर छलांग लगाने ही जा रही थी की एक बुजुर्ग ने उसे रोक लिया और उसे एक शेल्टर होम ले आया ।

तबस्सुम अपने बच्चे ​को गोद में लेकर इलाहाबद के यमुना पुल से छलांग लगाकर खुदकुशी करने पहुंच गई लेकिन अचानक एक बुजुर्ग ने उसे  बचा लिया और उसे छोड़ दिया एक शेल्टर होम । शेल्टर होम आकर तबस्सुम ​सिस्टर शीबा से मिली  और फिर  शीबा ​नेउसे एक नई जिंदगी दी उसे ​जिंदगी जीना ​सिखाया ।अनपढ़ तबस्सुम ने यही आकर जिंदगी में संघर्ष करने का सबक सीखा । तबस्सुम ने चन्दा करके एक  ई रिक्शा  खरीदा और यही ई रिक्शा इलाहाबद की सड़को में  चलाकर तबस्सुम  आज अपना और अपने परिवार के आठ लोगो की जिंदगी  चला रही है । अपने ज़ज़्बे और हौसले की वजह से  तबस्सुम आज उन तमाम महिलाओ के लिए एक नजीर बन गई है जो दहेज़ लोभियों के सामने जिंदगी से हार जाती है या फिर हालात से समझौता कर बैठती है ।

About Abhishek Tiwari

Check Also

करोड़ो रूपए गबन के आरोपी प्रो वीसी को क्राइम ब्रांच और पुलिस की टीम ने किया गिरफ्तार,

  इलाहाबाद – नैनी स्थित शुआट्स के डॉयरेक्टर प्रशासन और प्रो वीसी विनोद बी लाल को …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: