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आरती करने वाली मुस्लिम महिलाएं इस्लाम से खारिज

श्रीन्यूज़.कॉम।लखनऊ।देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने भले ही तीन तलाक के मामले में मुस्लिम महिलाओं को बड़ी राहत दे दी हो लेकिन विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुम उलूम देवबंद इससे जुदा फैसले देती है। दो दिन पहले ही मुस्लिम महिलाओं को सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट न करने का फतवा जारी करने वाले दारुम उलूम ने कुछ महिलाओं को इस्लाम से खारिज कर दिया है। इन महिलाओं ने वाराणसी में दीपावली के दिन भगवान राम की आरती की थी, जिसको दारुम उलूम गुनाह मानता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मुस्लिम महिलाओ के भगवान राम की आरती करने और उनके चित्र के समक्ष दीए जलाकर पूजा करने को लेकर इस्लामिक जगत में तूफान सा मच गया है। देवबंदी उलेमा ने ऐसी महिलाओं को इस्लाम मज़हब से खारिज करार दिया है। दारुल उलूम ज़करिया के वरिष्ठ उस्ताद और फतवा ऑन मोबाइल सर्विस के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारुकी समेत अन्य उलेमा-ए-कराम ने कहा कि मुसलमान सिर्फ अल्लाह की इबादत कर सकता है। जिन महिलाओं ने दूसरे मजहबी अकीदे को अपनाते हुए यह सब किया है वह इस्लाम से भी खारिज है। इस्लाम में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे मजहब के साथ मोहब्बत और नरमी तो बरती जा सकती है, लेकिन पूजा नहीं की जा सकती है। इसलिए बेहतर है कि वह अपनी गलती मानकर दोबारा कलमा पढ़कर इमान में दाखिल हों। दीपावली के अवसर पर वाराणसी में कुछ मुस्लिम महिलाओं के भगवान राम की आरती एवं चित्र के समक्ष दीये सजाकर पूजा करने को देवबंदी उलेमा ने इस्लाम से खारिज बताया है। इससे पहले भी कुछ महिलाओं ने राम नवमी पर भी भगवान राम के चित्र की आरती की थी। उन्होंने महिलाओं को अल्लाह से माफी मांग पुन: कलमा पढ़ इमान में दाखिल होने की हिदायत दी है।

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