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वह अपनी माँ को खुद स्टेशन छोड़ कर आया था ।

श्रीन्यूज़.कॉम।लखनऊ।आमतौर पर देखा गया हैं कि जब तक बच्चा अपने पैरों पर नही खड़ा हो जाता तब तक माँ और बाप दोनों बच्चे की भविष्य की चिंता करते हैं मगर ज्यो ही बच्चा अपने आप मे सक्षम हो जाता हैं तो वह अपनी चिंता स्वयं करने लगता हैं और हमारी युवा पीढ़ी उसे इंडिपेंडेंट होना कहती हैं मगर क्या उन माँ बाप के दिल से बच्चे की जगह खत्म हो जाती हैं ऐसा नही होता जीवन मे कभी भी माँ बाप का प्यार बच्चों के लिए कम नही होता मगर आज की युवा पीढ़ी जैसे जैसे अपने आप मे या यूं कह लीजिए कि खुद कमाने लगते हैं तो उनके दिल मे माँ बाप के लिए प्यार शायद कम पड़ जाता हैं ऐसा हम नही कह रहे हैं ऐसा आज की जेनरेशन के आचरण से लगता हैं इसकी एक बानगी देखने को मिली उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के स्टेशन चारबाग में 100 वर्षीय एक वृद्धा बेहोश मिली थी। उसे बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक संस्था और बलरामपुर अस्पताल की मदद से वृद्धा को उसकी 85 वर्षीय बेटी से मिलाया गया।1 अक्टूबर को वृद्ध महिला को बलरामपुर अस्पताल लाया गया था। उसकी हालत ऐसी थी कि वह कुछ भी बताने में असमर्थ थी। 15 दिनों तक लगातार इलाज के बाद उसने अस्पताल के स्टाफ को अपने बारे में बताया। वृद्धा ने बताया कि उसका नाम चंपा है और वह वाराणसी की रहने वाली है।इसके अलावा वह खुद के बारे में नहीं बता पाई। वृद्धा को अस्पताल लाने वाली एनजीओ ने सोशल मीडिया और रेडियो के जरिए वृद्धा के परिवार वालों को खोजना शुरू किया। आखिर में डालीगंज में रहने वाली उनकी बेटी पुष्पा उसके बेटे मुकेश के साथ बलरामपुर अस्पताल पहुंची। वह उसकी मां की हालत देखकर चौंक गई।मुकेश ने वाराणसी में रहने वाले उसके मामा को फोन किया। मुकेश ने कहा कि वह उसकी परदादी से बात करना चाहता है। उसके मामा ने मुकेश से कहा कि वह सो रही हैं, उनकी तबियत भी ठीक नहीं है इसलिए वह उससे बात नहीं कर सकती हैं।उसके बाद मुकेश ने उसकी परदादी का अस्पताल में ही एक विडियो बनाया और उसके मामा को भेज दिया। जिसके बाद उसने यह कबूल करते हुए कहा कि वह खुद उसकी मां को स्टेशन छोड़कर आया था। कहा कि वह मां से कोई संबंध नहीं रखना चाहता।बेटे के ऐसा बोलने के बाद वृद्धा की बेटी पुष्पा उसे अस्पताल से एक महीने बाद उसके साथ घर ले गई। बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि वृद्धा को बेहोशी की हालत में लाया गया था। होश आने और कुछ दिनों के इलाज के बाद उसने उसके रिश्तेदारों और परिवार के बारे में बताया।

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