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पूर्व मंत्री की मुसीबत कम नही हो रही हैं।

श्रीन्यूज़.कॉम।लखनऊ।सपा शासन काल के पूर्व कैबिनेट मंत्री पर शिकंजा लगातार कसता जा रहा हैं अदालत ने कहा कि चित्रकूट की महिला से छेड़छाड़, गाली-गलौज, धमकी देने और अपहरण के प्रयास के मामले में पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और उसके साथियों पर मुकदमा चलाने का पूरा आधार है। सीजेएम संध्या श्रीवास्तव ने गायत्री प्रजापति, आशीष शुक्ला और बब्लू सिंह के खिलाफ गोमतीनगर पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए सुनवाई के लिए 21 नवंबर की तारीख तय की है।अदालत ने बचाव पक्ष का अनुरोध खारिज करते हुए कहा कि मामलों के तथ्यों और विवेचना को देखते हुए स्पष्ट है कि संज्ञान लिए जाने व आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का पूरा आधार है। इस स्तर पर कोर्ट को केवल यह समझना है कि आरोपियों के खिलाफ मामला बनता है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पुलिस के पास जो भी कागजात की नकलें तैयार करके आरोपियों को दी जाएं और उसके बाद विचारण के लिए पत्रावली तुरंत जिला न्यायाधीश को भेज दी जाएं।गौरतलब है कि चित्रकूट की महिला ने गोमतीनगर थाने में 26 अक्तूबर 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आशीष शुक्ला ने उसे खनन का पट्टा दिलाने का लालच देकर शारीरिक संबंध बनाने को कहा तथा मना करने पर गाली-गलौज व धमकी दी थी।पुलिस की विवेचना के दौरान पता चला कि आरोपियों ने पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के कहने पर लखनऊ में फन मॉल के पास से वादिनी के अपहरण का प्रयास भी किया था । पुलिस ने मामले में गायत्री प्रजापति और आशीष शुक्ला के खिलाफ 25 जुलाई को चार्जशीट लगा दी थी।कोर्ट में चार्जशीट पहुंचने के बाद बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि वादिनी ने अपने कलमबंद बयान में कहा है कि उसने यह रिपोर्ट ही दर्ज नहीं कराई है। लिहाजा चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लिया जाना चाहिए। इस पर कोर्ट ने गत 9 अगस्त को विवेचक को वादिनी के हस्ताक्षर का नमूना लेकर एफआईआर की अर्जी से मिलान कराकर अपनी रिपोर्ट दे।इसी बीच वादिनी का एक शपथ पत्र कोर्ट को मिला जिसमें कहा गया था कि उसने कोई रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई है। उसके फर्जी हस्ताक्षर से किसी ने रिपोर्ट दर्ज करा दी है।शपथ पत्र आने के बाद विवेचक ने हस्ताक्षर का नमूना देने के लिए वादिनी को नोटिस भेजा, लेकिन वह हाजिर नहीं हुई। इस बीच गत 17 अक्तूबर को विवेचक को पता चला कि वादिनी गौतमपल्ली थाने में दर्ज गैंगरेप व पॉक्सो एक्ट के मामले में गवाही देने कोर्ट आई है। इस पर विवेचक ने कोर्ट की अनुमति से वादिनी से उसके हस्ताक्षर का नमूना देने को कहा लेकिन वादिनी ने इन्कार कर दिया। इस पर विवेचक ने विवेचना समाप्त करते हुए अदालत को रिपोर्ट देकर बताया कि आरोपी धनबल व बाहुबल से संपन्न है। उसके भय व प्रभाव के कारण वादिनी ऐसा बयान दे रही है। पुलिस की विवेचना समाप्त होने के बाद बचाव पक्ष ने संज्ञान न लेने का अनुरोध अदालत से किया था।

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