मांगलिक दोष: कारण और उपाय

[Updated on Dec 15 2012 5:40PM]

कुण्डली में जब प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल होता है तब मांगलिक दोष लगता है. इस दोष को शादी के लिए अशुभ माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि ये दोष जिनकी कुण्डली में होता है, उन्हें मंगली जीवनसाथी ही तलाश करनी चाहिए.

सातवां भाव जीवन साथी और गृहस्थ सुख का है. इन भावों में बने मंगल अपनी दृष्टि या स्थिति से सप्तम भाव अर्थात गृहस्थ सुख को हानि पहुंचाता है. ज्योतिशास्त्र में कुछ नियम बताए गए हैं जिससे शादीशुदा जीवन में मांगलिक दोष नहीं लगता है.

मांगलिक होने का मतलब?

कोई जातक चाहे वह स्‍त्री हो या पुरुष, उसके मांगलिक होने का मतलब है कि उसकी कुण्‍डली में मंगल अपनी प्रभावी स्थिति में है. शादी के लिए मंगल को जिन स्‍थानों पर देखा जाता है, वो 1,4,7,8 और 12 भाव हैं. इनमें से केवल आठवां और बारहवां भाव सामान्‍य तौर पर खराब माना जाता है. सामान्‍य तौर का अर्थ है कि विशेष परिस्थितियों में इन स्‍थानों पर बैठा मंगल भी अच्‍छे परिणाम दे सकता है.

लग्‍न का मंगल व्‍यक्ति के व्यक्तित्व को बहुत ज्यादा तेज बना देता है. चौथे का मंगल जातक को कड़ी पारिवारिक पृष्‍ठभूमि देता है. सातवें स्‍थान का मंगल जातक को साथी या सहयोगी के प्रति कठोर बनाता है. आठवें और बारहवें स्‍थान का मंगल आयु और शारीरिक क्षमताओं को प्रभावित करता है. इन स्‍थानों पर बैठा मंगल अगर अच्‍छे प्रभाव में है तो जातक के व्‍यवहार में मंगल के अच्‍छे गुण आएंगे और खराब प्रभाव होने पर खराब गुण आएंगे.

मांगलिक व्‍यक्ति देखने में कठोर निर्णय लेने वाला, कठोर वचन बोलने वाला, लगातार काम करने वाला, विपरीत लिंग के प्रति कम आकर्षित होने वाला, योजना बनाकर काम करने वाला, कठोर अनुशासन बनाने और उसका पालन करने वाला होता है. वो एक बार जिस काम में जुटे उसे अंत तक करने वाला, नए अनजाने कामों को शीघ्रता से हाथ में लेने वाला और लड़ाई से नहीं घबराने वाला होता है. इन्‍हीं विशेषताओं की वजह से गैर मांगलिक व्‍यक्ति ज्यादा देर तक मांगलिक के साथ नहीं रह पाता.

मांगलिक दोष ऐसे नहीं होगा दोष कारक:

मंगल भी निम्न लिखित परिस्तिथियों में दोष कारक नहीं होगा:

  • चतुर्थ और सप्तम भाव में मंगल मेष, कर्क, वृश्चिक या मकर राशि में हो और उस पर क्रूर ग्रहों की दृष्टि नहीं हो.
  • मंगल राहु की युति होने से मंगल दोष का निवारण हो जाता है.
  • लग्न स्थान में बुध और शुक्र की युति होने से इस दोष का परिहार हो जाता है.
  • कर्क और सिंह लग्न में लग्नस्थ मंगल अगर केन्द्र और त्रिकोण का स्वामी हो तो ये राजयोग बनाता है, जिससे मंगल का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है.
  • लड़के की कुण्डली में मंगल जिस भाव में बैठकर मंगली दोष बनाता हो लड़की की कुण्डली में उसी भाव में सूर्य, शनि या राहु हो तो मंगल दोष का शमन हो जाता है.
  • जन्म कुंडली के 1,4,7,8,12, वें भाव में स्थित मंगल अगर स्व उच्च मित्र आदि राशि-नवांश का वर्गोत्तम, षड्बली हो तो मांगलिक दोष नहीं होगा.
  • अगर 1,4,7,8,12 भावों में स्थित मंगल पर बलवान शुभ ग्रहों कि पूर्ण दृष्टि हो.

कैसे करें दूर

अगर कुण्डली में मंगल दोष का निवारण ग्रहों के मेल से नहीं होता है तो व्रत और अनुष्ठान करके इसका उपचार करना चाहिए. मंगला गौरी और वट सावित्री का व्रत सौभाग्य प्रदान करने वाला है. अगर जाने अनजाने मंगली लड़की की शादी इस दोष से रहित वर से होता है तो दोष निवारण हेतु इस व्रत का अनुष्ठान करना लाभदायी होता है.

जिस कन्या की कुण्डली में मंगल दोष होता है, वो अगर शादी से पहले गुप्त रूप से घट से या पीपल के पेड़ से शादी कर ले फिर मंगल दोष से रहित वर से शादी करे तो दोष नहीं लगता है.

प्राण प्रतिष्ठित विष्णु प्रतिमा से विवाह के बाद अगर लड़की शादी करती है, तो भी इस दोष का परिहार हो जाता है.

मंगलवार के दिन व्रत रखकर सिन्दूर से हनुमान जी की पूजा करने और हनुमान चालीसा का पाठ करने से मंगली दोष शांत होता है.

कार्तिकेय जी की पूजा से भी इस दोष में लाभ मिलता है.

महामृत्युंजय मंत्र का जप सारी परेशानियों का नाश करने वाला है. इस मंत्र से मंगल ग्रह की शांति करने से भी वैवाहिक जीवन में मंगल दोष का प्रभाव कम होता है.

लाल कपड़े में मसूर दाल, रक्त चंदन, रक्त पुष्प, मिठाई और द्रव्य लपेट कर नदी में प्रवाहित करने से मंगल अमंगल दूर होता है.


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