प्राकृतिक सुंदरता का शहर 'चमोली'

[Updated on Apr 9 2013 8:35AM]

 

चमोली उत्तराखंड का एक खूबसूरत जिला है. ये जगह अलकनंदा नदी के पास बद्रीनाथ मार्ग पर है. बर्फ से ढके पहाड़ इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं. भारत के प्रमुख धार्मिक स्थानों में से एक होने के कारण यहां काफी संख्या में पर्यटक आते हैं. 

चमोली की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है. यहां का मौसम हर समय सुहाना रहता है. यहां की सुंदरता का जितना भी विवरण किया जाए वो कम होगा. 

क्या देखें-

बद्रीनाथ- देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल बद्रीनाथ चार धामों में से एक है. भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर की स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थीबद्रीनाथ तीन भागों में विभाजित है- गर्भ गृह, दर्शन मंडप और सभा मंडप. 

अलकनंदा नदी के किनारे पर ही तप कुंड बन हुआ है. इस कुंड का पानी काफी गर्म है. इस मंदिर में प्रवेश करने से पहले इस गर्म पानी में स्नान करना जरूरी होता है. सर्दियों के दौरान ये नवंबर के तीसरे सप्ताह में बंद रहता है.  

हेमकुंड साहिब- यहां बर्फ से ढके सात पर्वत हैं, जिसे हेमकुंड पर्वत के नाम से जाना जाता है. इसके पास ही तार के आकार में एक गुरूद्वारा बना है. सिख धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थानों में से ये एक है. 

ऐसा माना जाता है कि गुरू गोविन्द सिंह जी ने यहां पर तपस्या की थी. यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा समय जुलाई से अक्टूबर है.

गोपेश्‍वर- गोपेश्‍वर शहर के आस-पास बहुत सारे मंदिर है. यहां के प्रमुख आकर्षण केन्दों में पुराना शिव मंदिर और वैतामी कुंड आदि है.

पंच प्रयाग- पंच प्रयाग में पांच प्रमुख नदियों का संगम होता है. ये पांच नदियां विष्णु प्रयाग, नंद प्रयाग, कर्म प्रयाग, रूद्र प्रयाग और देव प्रयाग है. ये नदियां गढ़वाल हिमालय से निकलती हैं.

देव प्रयाग- यहां दो प्रमुख नदियां अलकनंदा और भागीरथी मिलती हैं. इसके अलावा यहां कई प्रसिद्ध मंदिर और नदी घाट भी है. ऐसा माना जाता है कि देव प्रयाग में भगवान विष्णु ने राजा बाली से तीन कदम भूमि मांगी थी. यहां रामनवमी, दशहरा और बसंत पंचमी के अवसर पर मेले का आयोजन किया जाता है.

फूलो की घाटी- इस खूबसूरत जगह की खोज फ्रेंक स्मिथ और आर.एल. होल्डवर्थ ने 1930 में की थी. इस घाटी में सबसे अधिक संख्या में जंगली फूलों की किस्में देखी जा सकती हैं. इस घाटी में पौधों की 521 किस्में हैं. 

पौराणिक कथा के अनुसार हनुमान जी लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा के लिए यहां से संजीवनी बूटी लेने के लिए आए थे. आपको यहां पर काला भालू, हिरण, भूरा भालू, तेंदुए और चीता जैसे जानवर देखने को मिले गए.

कैसे जाएं-

रेल मार्ग- यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है.

हवाई अड्डा- जोलीग्रांड यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है. ये चमोली से 221 किलोमीटर की दूरी पर है.

सड़क मार्ग- उत्तराखंड की सभी जगहों से चमोली के लिए बसें चलती है.


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